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दिल्ली में दिल्ली के किसानों को किसान का दर्जा नहीं दे रही है दिल्ली सरकार : आदेश गुप्ता

  • आम आदमी पार्टी का जन्म एक किसान स्व. गजेन्द्र की शहादत पर तालियां बजाते हुए हुआ हो वो किसानों के हित की बात सोच भी कैसे सकती है
  • आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में भी कहा था कि सरकार में आने के बाद वह दिल्ली के किसानों को किसान का दर्जा देंगे लेकिन किसान का दर्जा देना तो दूर दिल्ली के किसानों को दिल्ली सरकार किसी प्रकार की सुविधा भी नहीं देती है
  • दिल्ली के किसानों की बदहाली की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ केजरीवाल सरकार की है लेकिन फिर भी केजरीवाल सरकार के मंत्री कृषि बिल के नाम पर तमाशा करते दिख जाएंगे
  • दिल्ली भाजपा यह मांग करती है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली के किसानों को किसान का दर्जा दें, कृषि यंत्रों की खरीद पर, बिजली में उन्हें सब्सिडी दी जाए, उन्हें ट्यूबवेल लगाने की अनुमति दी जाए
  • कोरोना संकट ने हमें सिखाया है कि जब विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं होता है तो वह अफवाह फैलाने का काम करते हैं

नई दिल्ली: केजरीवाल सरकार द्वारा दिल्ली के किसानों के अधिकारों का हनन हो रहा है और किसानों के नाम पर आम आदमी पार्टी राजनीति कर रही है। केजरीवाल सरकार के इस दोहरे बर्ताव को लेकर आज दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता और नई दिल्ली से सांसद मीनाक्षी लेखी ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित किया। प्रदेश महामंत्री हर्ष मल्होत्रा, मीडिया प्रमुख नवीन कुमार एंव प्रदेश प्रवक्ता हरीश खुराना, ऋचा पांडे मिश्रा उपस्थित थे।
अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि जिस आम आदमी पार्टी का जन्म एक किसान स्व. गजेन्द्र को पेड़ से लटका कर तड़पते हुए तालियां बजाते हुए हुआ हो वो किसानों के हित की बात सोच भी कैसे सकती है। संसद के अंदर यही परिदृश्य दिखा है जब आम आदमी पार्टी सांसद ने कृषि बिल को लेकर अमर्यादित व्यवहार किया, पूरे देश में इस कृत्य को देखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 से लगातार किसानों के हित और विकास के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए और कृषि बिल के जरिए भी किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को पूरा करने का काम किया है। वहीं कृषि बिल को लेकर भ्रामक प्रचार करने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार आखिर दिल्ली के किसानों के साथ कैसा बर्ताव कर रही है? आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में भी कहा था कि सरकार में आने के बाद वह दिल्ली के किसानों को किसान का दर्जा देंगे लेकिन किसान का दर्जा देना तो दूर दिल्ली के किसानों को दिल्ली सरकार किसी प्रकार की सुविधा भी नहीं देती है। न ट्रैक्टर खरीदने में, न कृषि यंत्र खरीदने में किसानों को किसी प्रकार की सब्सिडी दी जाती है, ट्यूब वेल लगाने की भी अनुमति नहीं है, यहां तक कि सिंचाई की सुविधा भी उन्हें नहीं दी जा रही है।

गुप्ता ने कहा दिल्ली के किसानों के लिए बिजली-पानी महंगा है, यही कारण है कि किसान का दर्जा ना मिलने पर किसान सम्मान निधि योजना से भी दिल्ली के किसान वंचित रह गए। दिल्ली के किसानों की बदहाली की जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ केजरीवाल सरकार है। लेकिन केजरीवाल सरकार के मंत्री कृषि बिल के नाम पर तमाशा करते दिख जाएंगे। दिल्ली भाजपा यह मांग करती है कि केजरीवाल सरकार दिल्ली के किसानों को किसान का दर्जा दें, कृषि यंत्रों की खरीद पर, बिजली में उन्हें सब्सिडी दी जाए, उन्हें ट्यूबवेल लगाने की अनुमति दी जाए। उन्होंने बताया कि नजफगढ़ क्षेत्र के कुछ किसानों ने मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल को ज्ञापन दिया है कि एक गांव है जहां 100 एकड़ से ज्यादा खेती करने योग्य जमीन है जहां साल भर पानी जमा रहता है और दिल्ली के मुख्यमंत्री दिल्ली जल बोर्ड के चेयरमैन भी है जिनके जिम्मेदारी है कि वह का ड्रेनेज सिस्टम सही करें ताकि उस जमीन पर किसान अपनी खेती कर सके।

सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि 20 सितंबर को किसानों के हित में कृषि बिल पारित हुआ, आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 तथा कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 और 27 सितंबर को राष्ट्रपति जी से इसकी अनुमति मिली। सियासत के इरादे से विपक्षी पार्टियां कृषि बिल को लेकर राजनीति कर रही है। 2019 के चुनाव में कांग्रेस के मेनिफेस्टो में कहा गया कि सभी नियमों को खत्म करके किसानों को उपनिवेशवाद से मुक्त कर देंगे और इस पर राहुल गांधी की कई वीडियो क्लिप है जहां वह भाषण देते दिख रहे हैं। विपक्षी पार्टियां इसे एक मौके के रूप में भी देख रही हैं, जिस प्रकार से इन्होंने नागरिकता कानून को लेकर यह अफवाह फैलाई कि इस कानून से देश के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी और इसी तरह जब किसानों के हितों के संरक्षण के लिए कृषि बिल आए तो विपक्षी पार्टियों ने अफवाह उड़ाई की एमएसपी व मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी। कोरोना संकट ने हमें सिखाया है कि जब विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं होता है तो वह अफवाह फैलाने का काम करते हैं।

लेखी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही कहा था कि यह सरकार गरीब, वंचित और शोषित वर्गों को समर्पित सरकार है। कांग्रेस के समय में तैयार हुई डॉ स्वामीनाथन की रिपोर्ट भी मोदी सरकार ने लागू करवाया। अटल टनल के कार्य को पूरा करवाने की जिम्मेदारी भी प्रधानमंत्री मोदी जी ने उठाई। उन्होंने बताया कि किसानों की तकलीफों को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में काफी वृद्धि कर दी है। सरकार अब इस नए मूल्य पर किसान से अनाज खरीदेगी। जो अनाज मंडियां हैं वे पहले की तरह काम करती रहेंगी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य भी जारी रहेगी। किसानों के पक्ष में लाये गए तीन कृषि कानून खेती में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देंगे जिससे कृषि क्षेत्र की पैदावार बढ़ेगी और किसान की आय भी बढ़ेगी। इन कानूनों से किसान समृद्ध होगा और बिचैलियों को भी अनुशासित किया जा सकेगा। नए कृषि कानूनों के आने से कृषि के क्षेत्र में ज्यादा प्रोफेशनल तौर तरीकों का इस्तेमाल होगा जिससे धान और गेहूं के अलावा दलहन, तिलहन, फल-फूल, सब्जियां आदि की पैदावार में भी भरी बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी। मोदी सरकार का यही उद्देश्य है कि देश के किसानों को उपनिवेशवाद से मुक्त किया जाए और राजनीतिक हथकंडों के कारण उन्हें शोषित न होना पड़े।

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