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पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के शिक्षा संबंधी अधिकार का दिल्ली सरकार कर रही है हनन

  • जारी सर्कुलर बन रहा अभिभावकों व स्कूलों के लिए परेशानी का सबब : प्रवेश वर्मा  
  • लगभग दस हजार से बारह हजार बच्चों का भविष्य खतरे में आ गया है

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2022: ईडब्ल्युएस तथा डीजी वर्ग के अभिभावक तथा विभिन्न स्कूल संस्थाओं की संयुक्त बैठक का आयोजन शनिवार को कंस्टीटूशन क्लब ऑफ़ इंडिया में कोआर्डिनेशन कमिटी ऑफ़ प्राइवेट स्कूल्स के तत्वाधान में हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और पश्चिमी दिल्ली से सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा को आमंत्रित किया गया था। किन्तु इस कार्यक्रम में सांसद प्रवेश साहिब सिंह ही उपस्थित हो पाए। सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कई सर्कुलर का जिक्र करते हुए बताया कि दिल्ली सरकार ने ना केवल ईडब्ल्युएस और डीजी कैटगरी के सीटों में कटौती की है बल्कि उन्होंने ऑफलाइन वाले बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया है। दिल्ली इकोनॉमिक सर्वें के अनुसार दिल्ली सरकार सरकारी स्कूलों के बच्चों पर वर्ष 2016 – 17 मे 50812 रुपये खर्च करती थी जो बढ़कर वर्ष 2020-21 मे 78082 रुपये हो गया लेकिन दिल्ली सरकार निजी विद्यालयों को आज भी लगभग 26000 रुपये का भुगतान करती है।

कोआर्डिनेशन कमिटी ऑफ़ प्राइवेट स्कूल्स के अध्यक्ष आलोक गोस्वामी ने बताया कि एक निजी विद्यालय के प्रिंसिपल के अनुसार दिल्ली सरकार ने ना केवल बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया बल्कि निजी विद्यालयों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की है। इसके कारण लगभग दस हजार से बारह हजार बच्चों का भविष्य खतरे में आ गया है। दिल्ली सरकार आरटीई एक्ट 2009 के नियम 12 (2) का भी उल्लंघन करती है। 05.08.2022 के सर्कुलर के अनुसार विद्यालय ऑफलाइन दाखिले किये गये बच्चों को भविष्य में शिक्षा नहीं प्रदान कर पाएंगे। इस मौके पर कई विद्यालयों के अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता तथा दिल्ली में कार्य कर रही बजट प्राइवेट स्कूल की विभिन्न संस्थाएं, साउथ दिल्ली प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन, प्राइवेट लैंड पब्लिक स्कूल ट्रस्ट, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन जोन 22, यूनाइडेड रेकोग्निसद स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन, प्राइवेट लैंड पब्लिक स्कूल एसोसिएशन, अफोर्डेबल प्राइवेट स्कूलएसोसिएशन, दिल्ली इंडिपेंडेंट स्कूल अलीज़, आल पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारी भी मौजूद रहें।

सभा को अवगत कराया गया कि अभी तक बहुत सारे विद्यालयों में दूसरी कक्षा के बाद यदि सीट खाली हो तो विद्यालय अॉफलाइन एडमिशन ले सकता है जिसके लिए दिल्ली सरकार ने विद्यालयों को नोटिस बोर्ड पर हर एक कक्षा में रिक्त सीटों को प्रदर्शित करने को कहा गया है जिसका विद्यालय पालन करता है तथा रिक्त सीटों को विद्यालय द्वारा ऑफलाइन भरा जा सकता है। दिल्ली सरकार अपने सरकारी स्कूलों के विभागीय प्रतिनिधियों द्वारा वेरिफाई भी कराता रहा है और इसका रिम्बर्समेंट यानि शुल्क वापसी भी निजी विद्यालयों को करता रहा है किन्तु अब दिल्ली सरकार ने 05.08.2022 को जारी किये गये सर्कुलर द्वारा इन सभी एडमिशन को निरस्त माना है तथा निजी विद्यालयों को आरटीइ एक्ट 2009 के अनुसार ईडब्ल्युएस और डीजी वर्ग के सभी ऑफलाइन एडमिशन का रिम्बर्समेंट करने से मना कर दिया है। इसके कारण लगभग दस हजार से बारह हजार बच्चों का भविष्य खतरे में आ गया है।

यहां सभा को अवगत कराया कि दिनांक 05.08.2022 को शिक्षा निदेशालय दिल्ली सरकार द्वारा एक सर्कुलर जारी किया जिसके अनुसार बहुत सारे मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र जिनका एडमिशन ऑफलाइन कक्षा दूसरी तथा उसके ऊपर की कक्षाओं में किया गया है, उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है। पत्र के अनुसार 2016-17 के बाद जितने बच्चों का एडमिशन ऑफलाइन मोड़ में ईडब्ल्युएस और डीजी वर्ग के अंतर्गत किया गया है, उन सबका एडमिशन दिल्ली सरकार वैध नहीं मानती है। गौरतलब यह है कि यह पत्र 2022 में जारी किया गया जिसमें दिल्ली सरकार पिछले सात वर्षाे के बच्चों का एडमिशन निरस्त करने की साजिश की गयी है।

 
सांसद ने दिल्ली सरकार को यह चेताया कि 05.08.2022 के पत्र को तुरंतनिरस्त किया जाये, तथा इन बच्चों कि शिक्षा को सुनिश्चित किया जाये अन्यथा अभिभावक अपने बच्चों को इन विद्यालयों मे नही पढ़ा पाएंगे। वैसे भी दिल्ली सरकार के विद्यालयों में यदि 30-40 विद्यालयों को छोड़ दिया जाये तो किसी भी विद्यालय मे मुलभुत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है, और दिल्ली सरकार बड़े बड़े विज्ञापन देकर अपनी पीठ थपथपाती है लेकिन बच्चों कि पढ़ाई को लेकर चिंतित नहीं दिखती है। ऐसे मे अभिभावक अपने बच्चों को एक पब्लिक स्कूल में पढ़ाने का जो सपना देखते हैं वो सपना ही रह जायेगा।

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