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‘‘दिल्ली ने शिक्षा में क्रांति लाकर पूरे देश को एक राह दिखाई : केजरीवाल’’

  • – जेईई व नीट में सफल छात्रों को सम्मानित कर बोले सीएम अरविंद केजरीवाल- हमारे सरकारी स्कूलों के 648 बच्चे नीट और 493 बच्चे जेईई में सफल हुए हैं, इनमें काफी बच्चे बहुत गरीब परिवार से हैं- देश के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मुहैया कराने का मेरा सपना है, मुझे खुशी है कि हम लोग कम से कम दिल्ली में हर बच्चे को अच्छी शिक्षा दे पा रहे हैं- हमारे स्टूडेंट्स, टीचर्स और प्रिंसिपल्स ने दिल्ली में शिक्षा क्रांति लाकर पूरे देश को दिशा दिखाई है कि सरकारी स्कूल ठीक हो सकते हैं- शिक्षा चैरिटी का मसला नहीं है, शिक्षा अधिकार का मसला है, देश के हर बच्चे को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए- हम हर बच्चे को अच्छी शिक्षा देकर एक पीढ़ी के अंदर अपने देश से गरीबी दूर सकते हैं और दिल्ली में हमने यह करके दिखा दिया है- हम सभी परिवार में सबसे अधिक तबज्जो शिक्षा को देते हैं, तो देश और राज्य के अंदर भी शिक्षा को सबसे अधिक तबज्जो दे सकते हैं – मैं मानता हूं कि सरकार के पास पैसा सीमित है, लेकिन हमारे उपर है कि हम उस पैसे को कहां खर्च करें- जब हमने सरकार संभाली, तब दिल्ली सरकार का बजट भी सीमित था, लेकिन हमने सबसे पहले बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का फैसला लिया – दिल्ली की तरह पूरे देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 18 करोड़ बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकती है और यह संभव है – सभी सफल बच्चों से अपील है कि कभी अपने परिवार, टीचर और अपने देश को मत भूलना, आपकी शिक्षा में देश के लोगों का पैसा लगा है – देश भर के 10 लाख सरकारी स्कूलों में 18 करोड़ बच्चे पढ़ते हैं, अधिकतर स्कूलों की हालत कबाड़खाने जैसी है, उन्हें ठीक करना है – देश के अंदर यह माहौल बना दिया गया है कि सरकार स्कूल नहीं चला सकती तो सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा- अगर सरकारी स्कूल बंद हो गए, तो 18 करोड़ बच्चे अनपढ़ रह जाएंगे, शिक्षा ही भारत को दुनिया का नंबर वन देश बना सकती है : अरविंद केजरीवाल / हमारे सरकारी स्कूलों के 1141 बच्चे नीट और जेईई में सफल हुए हैं, दिल्ली व देश के सरकारी स्कूल प्रणाली के लिए यह गर्व की बात है – दिल्ली में शिक्षा पर हो रहे काम का नतीजा है कि इतनी बढ़ी संख्या में हमारे स्कूलों के बच्चे जेईई व नीट में सफल हो रहे है : मनीष सिसोदिया

नई दिल्ली, 16 सितंबर, 2022 : मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जेईई और नीट की परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थियों को आज सम्मानित किया। त्यागराज स्टेडियम में आयोजित समारोह में सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली ने शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाकर पूरे देश को एक राह दिखाई है। हमारे सरकारी स्कूलों के 648 बच्चे नीट और 493 बच्चे जेईई में सफल हुए हैं। मेरा सपना है कि अपने देश के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मुहैया कराउं। मुझे खुशी है कि हम लोग कम से कम दिल्ली में हर बच्चे को अच्छी शिक्षा दे पा रहे हैं। आज हमारे स्टूडेंट्स, टीचर्स और प्रिंसिपल्स ने दिल्ली में शिक्षा क्रांति लाकर पूरे देश को दिशा दिखाई है कि सरकारी स्कूल ठीक हो सकते हैं। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि शिक्षा चैरिटी का नहीं, अधिकार का मसला है। देश के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए। हम हर बच्चे को अच्छी शिक्षा देकर एक पीढ़ी के अंदर अपने देश से गरीबी दूर सकते हैं और दिल्ली में हमने यह करके दिखा दिया है। हम परिवार में सबसे अधिक तबज्जो शिक्षा को देते हैं, तो देश और राज्य के अंदर भी दे सकते हैं। जब हमने सरकार संभाली, तब दिल्ली सरकार का बजट भी सीमित था, लेकिन हमने सबसे पहले बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का फैसला लिया। दिल्ली की तरह पूरे देश के सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा दी जा सकती है और यह संभव है।

दिल्ली सरकार ने जेईई और नीट में सफलता हासिल करने वाले दिल्ली सरकार के स्कूलों के बच्चों को सम्मानित करने के लिए आज त्यागराज स्टेडियम में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया। समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रहे। इस दौरान उमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया, शिक्षा सचिव समेत शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। दिल्ली सरकार के निमंत्रण पर सम्मान समारोह में छात्रों के माता-पिता को भी शामिल हुए। समारोह का शुभारम्भ स्वागत गीत के साथ हुआ। इसके बाद नीट और जेईई में सफल होने वाले छात्रों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपने अनुभवों को साझा किया। एक-एक बच्चे ने बताया कि कैसे उन्होंने सफलता हासिल की। कई बच्चे ऐसे हैं, जो बेहद गरीब परिवार से आते हैं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आज अच्छे रैंक के साथ डॉक्टर और इंजीनियर बनने जा रहे हैं। इस दौरान इन बच्चों ने अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता भी व्यक्त की। उनका कहना था कि शिक्षकों ने पढ़ाई में उनकी बहुत मदद की, जिसकी बदौलत उनको अच्छी रैंक हासिल करने में आसानी हुई।

हम जब एक-एक बच्चे की कहानी सुन कर रहे थे, तब सबकी आंखों में पानी आ रहा था- अरविंद केजरीवाल

इस अवसर पर छात्रों को संबोधित करते हुए सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज बहुत महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन है। हम जब एक-एक बच्चे की कहानी सुन रहे थे, तो सबकी आंखों में पानी आ रहा था। एक-एक बच्चे की कहानी किसी करिश्मा से कम नहीं थी। हमारे सरकारी स्कूलों के 648 बच्चे नीट की परीक्षा में सफल हुए हैं। यह बच्चे बहुत गरीब परिवार से आते हैं और विषम परिस्थितियों में रहते हैं। इसमें 199 लड़के हैं और 449 लड़कियां हैं। लड़कियां पूरी तरह से बाजी मार गई हैं। इसी तरह, जेईई में 493 बच्चे सफल हुए हैं। यहां 404 लड़के और 89 लड़किया सफल हुई हैं। इसमें लड़के बाजी मार ले गए हैं। इसका मलतब कि लड़कियां ज्यादा डॉक्टर बनना चाहती हैं और लड़के इंजीनियर बनना चाहते हैं। इस बार दिल्ली के सरकारी स्कूलों के कुल 1141 बच्चों ने जेईई और नीट में सफलता हासिल की है। मैं इन सभी बच्चों, इनके पैरेंट्स और शिक्षकों को शुभकामनाएं देता हूं। अभी हमने एक-एक बच्चे की कहानी भी सुनी। एक बच्चा हर्ष का 569 रैंक आया है। मेरा जेईई में 563 रैंक आया था। 1958 में मैंने जेईई के पेपर दिए थे।

मैं बहुत साधारण व्यक्ति हूं, इस देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है, आज जो कुछ हूं, इस देश की वजह से हूं- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं बहुत साधारण व्यक्ति हूं। आज कुछ भी हूं, इस देश की वजह से हूं। मुझे अपनी जिंदगी में बहुत अच्छी शिक्षा मिली है। मेरा एक सपना था कि जो शिक्षा मुझे मेरे देश ने मुझे दी है, वैसी ही अच्छी शिक्षा मैं इस देश के हर बच्चे को मुहैया करा पाउं। चाहे वो गरीब का बच्चा हो या अमीर का बच्चा हो। आज मुझे बेहद खुशी है कि हम लोग कम से कम दिल्ली के अंदर हर गरीब और अमीर के बच्चे को अच्छी से अच्छी शिक्षा मुहैया करा पा रहे हैं। हमारे जितने बच्चों ने सफलता हासिल की है, उन सभी से मेरी विनती है कि आप लोग डॉक्टर और इंजीनियर बनोगे। आप लोग खूब सफल हो और आगे बढ़ो। लेकिन दो बातें हमेशा याद रखना। पहला, अपने परिवार और शिक्षक को मत भूल जाना। कई बच्चों ने अपनी कहानियां सुनाई कि कैसे उनके माता-पिता ने बड़ी कठिन परिस्थितियों में अपना पेट काट कर उनको पढ़ाया है। जब आप डॉक्टर और इंजीनियर बन जाओ, तो अपने मां-बाप और टीचर का ख्याल रखना। दूसरा, देश के लिए कुछ अवश्य करना। आपको जो इतनी अच्छी और फ्री में शिक्षा मिली है, लेकिन कुछ भी फ्री में नहीं मिलता है। आपकी शिक्षा में देश के लोगों का पैसा लगा है। इस देश का गरीब से गरीब आदमी भी टैक्स देता है। दूध, दही, किताब, माचिस खरीदते हैं, तो उस पर टैक्स लगता है। इस देश का एक भिखारी भी टैक्स देता है। गरीब से गरीब लोगों के टैक्स के पैसे से आप लोगों को इतनी शानदार शिक्षा मिली है। इसलिए देश को मत भूल जाना।

अगर विदेश जाने का मौका मिले, तो वापस जरूर आ जाना, ऐसा मत करना कि पढ़ाई यहां से करो और तरक्की अमेरिका की करो- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जो लोग डॉक्टर बनने जा रहे हैं, आप सभी लोग यहां से कसम खाकर जाओ कि कम से कम आधे मरीज गरीबों के फ्री में देखोगे। जितने इंजीनियर बन रहे हैं, आप भी अपने स्तर पर देश के लिए जो बन सकेगा, वो करना। 5-5, 10-10 बच्चों को पढ़ने में मदद करोगे। आप में से बहुत सारे लोगों को विदेश जाने का मौका मिलेगा। मैं 1989 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की थी। मेरे नंबर अच्छे आए थे। हमारी क्लास में बहुत सारे बच्चे विदेश चले गए। विदेश जाना बुरी बात नहीं है, लेकिन फिर वापस जरूर आ जाना। रहना अपने देश के अंदर है और मरना अपने देश के अंदर है। ऐसा मत करना कि पढ़ाई यहां से करो और तरक्की अमेरिका की करो। दूसरे देशों से ज्ञान लेकर आना और आकर अपने देश के अंदर काम करना। आज दिल्ली ने एक तरह से पूरे देश को एक राह दिखाई है। इसके लिए मैं सभी शिक्षकों और प्रिंसिपल का आभार व्यक्त करता हूं। सभी बच्चों ने बताया कि टीचर ने उनकी बहुत मदद की। 2014 के पहले जब दिल्ली में हमारी सरकार नहीं बनी थी, तब हम सुना करते थे कि सरकारी शिक्षक तो काम नहीं करते हैं। स्कूल आकर पेड़ के नीचे बैठ कर स्वेटर बुनते रहते हैं। आज वही सरकारी टीचर है। दिल्ली सरकार में 60 हजार सरकारी टीचर हैं। हमने किसी को बदला नहीं है। आज उनको अच्छा माहौल मिल गया और उन्होंने करिश्मा करके दिखा दिया।

देश में दो समानांतर शिक्षा प्रणाली चल रही है, गरीबों के लिए सरकारी स्कूल और अमीरों के लिए प्राइवेट स्कूल- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि हमारे देश में एक तरह से दो समांतर शिक्षा प्रणाली चल रही हैं। एक गरीबों के लिए और एक पैसे वालों के लिए है। गरीबों के लिए सरकारी स्कूल होते हैं और पैसे वालों के लिए प्राइवेट स्कूल होते हैं। दिल्ली में अब सरकारी स्कूलों में काफी सुधार हो गया है, लेकिन पूरे देश के अंदर सरकारी स्कूलों का बेड़ा गर्क है। देश भर के सरकारी स्कूलों में करीब 18 करोड़ बच्चे पढ़ते हैं और देश के अंदर 10 लाख सरकारी स्कूल हैं। कई अच्छे भी सरकारी स्कूल हैं, लेकिन जो खराब हैं, उनकी हालत किसी कबाड़खाने से कम नहीं है, हमें उन्हें ठीक करना है। इन सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 18 करोड़ बच्चों का भविष्य खराब है। देश के अंदर एक माहौल यह बनता जा रहा था कि सरकार स्कूल चला नहीं सकती। इसलिए सरकारी स्कूलों को प्राइवेट को दे दो। बीच में एक माहौल चल रहा था कि एसएसआर में चैरिटेबल आधार पर कंपनियों को स्कूल दे दो। शिक्षा चैरिटी का मसला नहीं है, शिक्षा अधिकार का मसला है। इस देश में पैदा होने वाले हर बच्चे का अधिकार है कि उसको अच्छी से अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए। किसी के रहमो-करम और चैरिटी के उपर हमारे बच्चे नहीं पढ़ेंगे। देश के अंदर एक यह भी माहौल बना दिया गया कि सरकार स्कूल नहीं चला सकती तो सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा। अगर सरकारी स्कूल बंद हो गए, तो इनमें पढ़ने वाले 18 करोड़ बच्चे तो अनपढ़ रह जाएंगे। इन बच्चों के माता-पिता के पास प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने में पैसे नहीं है। अगर हमारे 18 करोड़ बच्चे अनपढ़ रह गए, तो देश आगे कैसे बढ़ेगा। भारत दुनिया का नंबर वन देश कैसे बनेगा। सिर्फ शिक्षा ही भारत को दुनिया का नंबर वन देश बना सकती है।

अगर हमने सरकारी स्कूलों के 18 करोड़ बच्चों को अच्छी शिक्षा दे दी, तो हमारा देश अमीर और दुनिया का नंबर वन देश बन जाएगा- अरविंद केजरीवाल

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज हमने जितने बच्चों की कहानियां सुनी। उनमें किसी बच्चे के पिता 8 हजार, किसी के 10 हजार, तो किसी के पिता 15 हजार रुपए महीना कमाते हैं। अब जब यह बच्चा आईआईटी से पढ़कर आएगा, तो उसकी शुरूआती सैलरी दो लाख रुपए महीना होगा। जो डॉक्टर बनेगा, उसकी शुरूआती सैलरी तीन लाख रुपए महीना होगी। इस तरह इन बच्चों के परिवार अमीर हो गए। हम अपने देश को अमीर पैसे बांट कर नहीं बना सकते, हर बच्चे को अच्छी शिक्षा दे दो और वो अपने परिवार को अमीर बना लेगा। अगर हम अपने हर बच्चे को अच्छी शिक्षा दे देंगे, तो एक पीढ़ी के अंदर हम अपने देश से गरीबी दूर सकते हैं और यह हमने करके दिखा दिया है। ये लोग पहले कहते थे कि सरकारी स्कूल ठीक नहंी हो सकते। लेकिन हमारे बच्चों व उनके माता-पिता, टीचर्स और प्रिंसिपल ने मिलकर दिल्ली के अंदर शिक्षा क्रांति लाई है, जिसने पूरे देश को दिशा दिखाई है कि सरकारी स्कूल ठीक हो सकते हैं। मैं रोज दूसरे राज्यों में सरकारी स्कूल बंद होने की खबरें पढ़ता हूं। वे कहते हैं कि उनके पास पैसा नहीं है। मैं मानता हूं कि सरकार के पास पैसा सीमित है, लेकिन हमारे उपर है कि हम उस पैसे को कहां खर्च करें। मान लीजिए कि एक गरीब आदमी की सैलरी 20-25 हजार रुपए महीना है। वो सबसे ज्यादा अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देने को तबज्जो देता है, ताकि बच्चे पढ़-लिखकर बड़े आदमी बन जाएं। इसके बाद बाकी चीजों के बारे में सोचता है। अगर हम परिवार में सबसे अधिक तबज्जो शिक्षा को देते हैं, तो देश और राज्य के अंदर भी हम शिक्षा को सबसे अधिक तबज्जो दे सकते हैं। जब हमने सरकार संभाली तब दिल्ली सरकार का बजट भी सीमित था। लेकिन हमने सबसे पहले बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का फैसला लिया। हमने बच्चों की शिक्षा के उपर जितने पैसे की जरूरत पड़ी, उतना पैसा लगाया। हम कर तो सकते हैं, लेकिन प्राथमिकता की बात है। मेरा दिल कहता है कि दिल्ली के अंदर हमने करके दिखा दिया, यह पूरे देश में हो सकता हैै। देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 18 करोड़ बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकती है और यह संभव है। अगर हमने अपने 18 करोड़ बच्चों को अच्छी शिक्षा दे दी, तो हमारा देश अमीर और दुनिया का नंबर वन देश बन जाएगा।

हमारे बहुत से स्टूडेंट्स आर्थिक व भावनात्मक रूप से कठिन दौर देखने के बावजूद रूके नहीं और सफलता हासिल की- मनीष सिसोदिया

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज का दिन दिल्ली और पूरे देश के सरकारी स्कूल सिस्टम के लिए गर्व करने का दिन है। क्योंकि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 1141 बच्चों ने नीट और जेईई का एग्जाम क्वालीफाई किया है। देश में हर साल 9 लाख बच्चे जेईई और 17 लाख बच्चे नीट की परीक्षा देते है और हमारे स्कूलों के 1141 बच्चों ने 26 लाख बच्चों के बीच कम्पटीशन कर यह उपलब्धि हासिल की है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी बच्चों ने अपनी आँखों में भविष्य में कुछ बनकर देश की सेवा करने का सपना संजो रखा है और यह सपना पढ़ाई से पूरा होगा, क्योंकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी का मानना है कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा दे दी जाए तो भारत अपने आप विश्व का नंबर-1 देश बन जाएगा। इसके लिए पिछले 7 सालों से लगातार मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में उनके नेतृत्त्व में हम दिल्ली के सरकारी स्कूलों को शानदार बनाने का काम कर रहे है। हमारे स्कूलों के बच्चे इतनी बड़ी संख्या में जेईई -नीट की परीक्षा पास कर रहे है, यह शिक्षा पर किए जा रहे उसी काम का नतीजा है। उन्होंने कहा कि हमारे स्कूलों में पढ़ने वाले बहुत से स्टूडेंट्स ने आर्थिक और भावनात्मक रूप से अपने जीवन में सबसे कठिन समय देखा है, लेकिन वे दृढ़ थे और वे कभी नहीं रुके। उन्होंने साबित कर दिया है कि मुश्किलों के बावजूद वो अच्छे से पढ़ सकते हैं, कड़ी मेहनत कर सकते हैं और जेईई-एनईईटी जैसी कठिन परीक्षाओं को पास कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने नीट व जेईई में सफल छात्रों को किया सम्मानित

इस अवसर पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने जेईई एडवांस में सफल होने वाले छात्रों को सम्मानित किया। यह वे बच्चे हैं, जो जेईई एडवांस की परीक्षा में 26 लाख बच्चों के साथ बैठे थेे और पहले एक हजार के रैंक अंदर आए हैं। सीएम ने जेईई एडवांस में सफल छात्र सुमुख बंसल और देवाग्य, अमन, जय कुमार, पवन शर्मा, शुशील कुमार, साहिल, केशव बंसल, अनूप मिश्रा, श्याम कौशिक, हर्ष, पियूष, पीपांशु पांडे, कार्तिक, यश तिवारी को सम्मानित किया। इसके बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ने नीट में सफल छात्र मोहम्मद अहराम, पृथ्वी राज सिंह राठौर, शुभम कुमार, करण तनेजा, प्रेरित गौतम, साहिल गुप्ता, मुकेश कुमार, नीतिश कुमार, प्रिया मीना, अंजलि सिंह, मुस्कान अग्रवाल, शिवम कुमार झा को सम्मानित किया।

इन छात्रों ने विषम परिस्थितियों में भी खुद को किया साबित

करण तनेजा-

दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-17 स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास करने वाले करण तनेजा नीट की परीक्षा में 402 (जनरल-ईडब्ल्यूएस) रैंक हासिल किया है। 11वी कक्षा में उन्होंने इस स्कूल में एडमिशन लिया था। इससे पहले, उन्होंने सर्वाेदय विद्यालय पीतमपुरा में पढ़ाई की है। जब करण तनेजा मात्र 10 साल के थे, उस दौरान उनके माता-पिता की मृत्यु हो गई थी। माता-पिता का सपना था कि भविष्य में करण डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करें। करण का बड़ा भाई दुकान में काम करता है और हर माह केवल 8 हजार रुपये कमाकर परिवार की जरुरतों को पूरा कर रहा है। करण को स्कूल के शिक्षकों और एचओएस और लाइब्रेरियन का काफी स्पोर्ट मिला और उन्हें लाइब्रेरी से किताबें देने में भी मदद की।

अंजलि सिंह-

तुगलकाबाद स्थित रेलवे कॉलोनी-एसकेवी (रानी झांसी) से 12वीं की परीक्षा पास करने वाली अंजलि सिंह ने नीट की परीक्षा में 598 (जनरल-पीएच) रैंक हासिल किया है। अंजलि के पिता सुरक्षा गार्ड हैं और मां गृहिणी हैं। वह 8वीं कक्षा तक प्राइवेट स्कूल में पढ़ी थी लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अंजलि को स्कूल छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सरकारी स्कूल में दाखिला लिया। स्कूल बदलने के दौरान वह अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित थी, लेकिन एडमिशन के बाद उन्होंने महसूस किया कि स्कूल में सभी सुविधाएं है और सभी बच्चों को हाई क्वॉलिटी एजुकेशन दी जा रही है। अंजलि ने बिना किसी कोचिंग के नीट की परीक्षा में सफलता हासिल की है और अपनी फैमिली में वह डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई करने वाली पहली लड़की हैं।

हर्ष-

हर्ष ने जेई की परीक्षा में 569 (जनरल-ईडब्ल्यूएस) रैंक नंबर हासिल किया है। उनके पिता का साप्ताहिक बाजार में स्टॉल लगाते हैं और माता गृहिणी हैं। कोरोना महामारी के दौरान अपने पिता के स्टॉल में मदद करने के लिए उन्हें 11वीं कक्षा में क्लासेज छोड़नी पड़ीं। उनके शिक्षक राजीव, सुधीर, रजनी ने उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करते रहे। वे उनके साथ ई-बुक्स शेयर करते थे, ताकि वह अपने पिता की मदद करते हुए टैब पर आसानी से पढ़ाई कर सकें। जब वह 12वीं कक्षा में थे, तो उनकी मां काम पर जाने लगीं, ताकि बेटा जेईई की पढ़ाई कर सकें। जेईई मेंस की परीक्षा से ठीक पहले उन्हें दिल की बीमारी का पता चला था, जिसकी तत्काल सर्जरी होनी थी। इसके कारण उन्होंने जेईई की परीक्षा न देने का फैसला किया। लेकिन हर्ष के शिक्षकों ने उन्हें देने के लिए प्रेरित किया।

मुकेश कुमार-

आदर्श नगर स्थित जीबीएसएसएस-1 से 12वीं की परीक्षा पास करने वाले मुकेश कुमार ने नीट की परीक्षा में 504 (एससी) रैंक हासिल किया है। वह पहले गोरखपुर में रहते थे। लेकिन बेहतर अवसरों के लिए उनके पिता ने दिल्ली आने का फैसला लिया। उनके पिता पेशे से पेंटर हैं। मुकेश का सपना सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना था, लेकिन वे एनडीए में फिजिकल परीक्षा को पास नहीं कर पाएं। उनके कैमिस्ट्री टीचर पंकज ने उन्हें यह समझाने में मदद की कि डॉक्टर बनकर भी राष्ट्र की सेवा की जा सकती है। इसलिए उन्हें मेडिकल की स्टडी करने के लिए प्रोत्साहित किया। मुकेश का सपना है कि वह डॉक्टर बनकर अपने गांव के लोगों की सेवा कर सके। साथ ही ग्रामीण बच्चों को कड़ी मेहनत करने और राष्ट्र की सेवा करने के लिए प्रेरित करें। खास बात यह है कि मुकेश अपने परिवार में पहले ग्रेजुएट होंगे।

प्रेरित गौतम-

सेक्टर-17 रोहिणी स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास करने वाले प्रेरित गौतम ने नीट की परीक्षा में 405 (जनरल-ईडब्ल्यूएस) रैंक हासिल की है। उनके पिता ऑटो चालक हैं। साल 2019 में आंत के अल्सर का गलत इलाज किया गया था। ऐसे में उनके इलाज में काफी खर्च आय़ा और उन्हें कर्ज लेना पड़ा। पिता की यह स्थिति देख उन्होंने मेडिकल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला लिया, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उनके भाई ने भी अपनी पॉलिटेक्निक परीक्षा को रोक लिया, ताकि प्रेरित की शिक्षा का खर्च उठा सकें। प्रेरित को पढ़ाई से एक साल भी न गंवाना पड़े, इसके लिए उनके पिता कर्ज की किस्तों में देरी के चलते कानूनी कार्रवाई का जोखिम उठा रहे हैं। वहीं, प्रेरित के टीचर नीरज कश्यप ने उनके साथ सभी रेफरेंस बुक शेयर की, ताकि वे पढ़ाई जारी रखें।

प्रिया मीना

तुगलकाबाद के रानी झांसी सर्वाेदय कन्या विद्यालय से 12वीं की परीक्षा पास करने वाली प्रिया मीना ने नीट की परीक्षा में 597 (एससी) रैंक हासिल किया है। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते प्रिया के पैरेंट्स ने निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में उनका दाखिला लिया था। अन्य छात्रों और विशेष रूप से निजी स्कूलों के छात्रों के साथ तुलना करने से उनका मनोबल गिरने लगा था, लेकिन 10वीं में उनकी शिक्षिका रजनी बाला ने उनमें आत्मविश्वास पैदा किया। साथ ही जिंदगी में हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्तिक-

पश्चिम विहार, ए 6-आरपीवीवी से 12वीं की परीक्षा पास करने वाली कार्तिक ने जेई की परीक्षा में 881 (एससी) रैंक हासिल किया है। उनके पिता एक जूता बनाने वाली एक कंपनी में मजदूर हैं। कार्तिक को कोविड-19 के दौरान आर्थिक रूप से काफी संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि उनके पास ऑनलाइन कक्षाओं में हिस्सा लेने और पढ़ाई करने के लिए कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं था। ऐसी स्थिति में स्कूल की ओर से उन्हें टैब दिया गया। साथ ही सीएम वाई-फाई ने उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद की।

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