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भारत, नीदरलैंड और इंग्लैंड के विशेषज्ञों ने शिक्षकों के साथ प्रोफेशनल्स के बतौर व्यवहार पर पैनल चर्चा की

  • उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पैनल चर्चा के सुझाव और विश्व की बेस्ट प्रेक्टिस के अनुभवों का दिल्ली सरकार के लिए काफी महत्व है, हम मिलकर काम करें और उन्हें लागू करें
  • हमें सूक्ष्म-प्रशिक्षण पारिस्थितिकी प्रणालियों का निर्माण करना चाहिए, ताकि बेहतर शिक्षक व्यावसायिक विकास के अवसर पैदा हो
  • हमें शिक्षकों को अपनी शिक्षण योजनाओं को कक्षाओं के बाहर लागू करने और अपने विचारों पर काम करने का अवसर देना चाहिए रू हैरी फ्लेचर वुड, एसोसिएट डीन, एंबिशन इंस्टीट्यूट, इंग्लैंड

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन 2021 के तीसरे दिन भारत, नीदरलैंड और इंग्लैंड के नीति विशेषज्ञों ने ‘ट्रीटिंग टीचर्स एज प्रोफेशनल्स‘ पर पैनल चर्चा की। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने, अच्छे बुनियादी ढांचे को विकसित करने और शिक्षकों के लिए अनुकूल कार्य वातावरण का निर्माण करना दिल्ली सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। एक साथ काम करके हम इन सभी विचारों को लागू कर सकते हैं।

शिक्षकों के प्रोफेशनल विकास पर चर्चा करते हुए शैक्षिक संसाधन इकाई (इंडिया) की निदेशक विमला रामचंद्रन ने कहा कि भारत में शिक्षकों के पेशेवर विकास की आवश्यकता है। हम उनका समुचित विकास करते हुए सूक्ष्म-प्रशिक्षण पारिस्थितिकी प्रणालियों का निर्माण करके सही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। इस पैनल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई विशेषज्ञ शामिल हुए। इनमें जेलेमर एवर्स (नीदरलैंड के लर्निंग एक्सपर्ट और इनोवेटर), सुब्रमण्यन गिरिधर (अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के सीओओ), हैरी फ्लेचर वुड (एम्बिशन इंस्टीट्यूट में एसोसिएट डीन) और लुसी क्रेहन (क्लीवर लैंड्स पुस्तक की लेखिका और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सलाहकार) के नाम प्रमुख हैं। सत्र का संचालन दिल्ली शिक्षा निदेशालय के मेंटर शिक्षक मुरारी झा ने किया।

पैनल चर्चा के चार प्रमुख विषयों में भारत बनाम अन्य जगहों पर शिक्षकों के कार्यभार, शिक्षकों की प्रेरणा या इसके अभाव को प्रभावित करने वाले कारक, शिक्षकों की स्वायत्तता और व्यावसायिक विकास के प्रभावी तरीके जैसे विषय शामिल थे। इसके बाद एक प्रश्नोत्तर दौर भी चला। सुब्रमण्यन ने स्वैच्छिक शिक्षक मंच के महत्व पर प्रकाश डाला जो जमीनी स्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा मंच है जहां 20-25 शिक्षकों का समूह किसी एक विषय को लेकर कहता है कि क्या हमलोग इसे कल बेहतर तरीके से पढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए प्रशासनिक सहायता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

रामचंद्रन ने स्वयंसेवी शिक्षक मंच को शिक्षकों के व्यावसायिक विकास का महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर व्यवस्थित क्लस्टर समूहों की आवश्यकता है। वहाँ भी एक सकारात्मक प्रक्रिया के बाद शिक्षक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। यह तभी हो सकता है जब शिक्षक एक साथ प्रशिक्षित हों और उनका रिसोर्स पर्सन नियमित रूप से फीडबैक देने में सक्षम हो। नीदरलैंड के विशेषज्ञ एवर्स ने समग्र व्यवस्थित मुद्दों को स्वीकार करने का महत्व बताते हुए कहा कि अब सिर्फ एक अच्छा शिक्षक होना काफी नहीं है। यदि आप शिक्षा में प्रणालीगत मुद्दों के बारे में नहीं जानते हैं, तो नई प्रथाओं का उपयोग करना मुश्किल होगा।

लेखिका लूसी क्रहान ने अन्य देशों के तुलनात्मक मॉडल पेश किए। उन्होंने कहा कि जापान, चीन, सिंगापुर में लेसन स्टडी’ का अभ्यास किया जाता है। शिक्षक एक साथ आकर किसी विषय को पढ़ाने की योजना बनाते हैं। अपने अभ्यास के बारे में सहकर्मियों से बात करना काफी प्रेरणा देता है। इंग्लैंड में एक इतिहास के शिक्षक फ्लेचर ने कहा कि शिक्षकों को अपने विचार बनाने तथा लागू करने का अवसर देना काफी उपयोगी है। हमें शिक्षकों को कक्षाओं के बाहर अपने विचारों पर काम करने और अपनी शिक्षण योजनाओं को बेहतर बनाने का अवसर दें। इससे उन्हें उन आदतों की पहचान में मदद मिलेगी, जिन्हें बदलने की आवश्यकता है।

एवर्स ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के वक्तव्य पर सहमति जताते हुए कहा कि व्यवस्था को दोष देने के बजाय शिक्षा सुधार के लिए शिक्षकों को अवसर प्रदान करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को स्वायत्तता प्रदान करना और संगठन के भीतर उन्हें शिक्षक एजेंसी के बतौर अवसर प्रदान करना काफी महत्वपूर्ण है।

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