Homeअंतराष्ट्रीयबीजेपी ने 14 साल में दिल्ली एमसीडी को बनाया दिवालिया: सिसोदिया

बीजेपी ने 14 साल में दिल्ली एमसीडी को बनाया दिवालिया: सिसोदिया

  • उत्तरी एमसीडी के पास मात्र 12 करोड़ रु बचे हैं, पूर्वी एमसीडी के पास मात्र 99 लाख रु हैं, जबकि एमसीडी पर दिल्ली सरकार का 6276 करोड़ रुपया बकाया है
  • ’नियमतः दिल्ली सरकार की कोई देनदारी नहीं, खुद आर्थिक तंगी के बावजूद अन्य योजनाओं से निकालकर एमसीडी कर्मियों की सैलरी के लिए 938 करोड़ दे रही है दिल्ली सरकार
  • एमसीडी में बीजेपी का भ्रष्टाचार चरम पर, हरेक लेंटर पर पैसे लिए जाते हैं

नई दिल्ली : उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरूवार को दिल्ली नगर निगम को कर्मचारियों की सैलरी के लिए 938 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि इन पैसों पर नजर रखना, कहीं केजरीवाल सरकार की तरफ से भेजे गए इन पैसों को भी बीजेपी वाले ना खा जाएं। उन्होंने कहा कि एमसीडी कर्मचारियों की पीड़ा देखकर माननीय मुख्यमंत्री के आदेश पर दिल्ली सरकार ने अन्य योजनाओं से निकालकर इन 938 करोड़ रुपयों का इंतजाम किया है। सिसोदिया ने एक संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि 14 साल पहले एमसीडी की सत्ता में आई बीजेपी ने तीनों नगर निगमों को पूरी तरह दिवालिया बना दिया। इतनी बुरी तरह चूस लिया कि अब गुठली भी नहीं छोड़ी है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के बैंक खाते में मात्र 12 करोड़ रुपए बचे हैं जबकि पूर्वी नगर निगम के पास मात्र 99 लाख रुपये हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एमसीडी पर दिल्ली सरकार का 6276 करोड़ रुपया बकाया है। एमसीडी को बीजेपी ने दिवालिया करके इतनी बड़ी राशि का कर्जदार बना दिया। अब नगर निगम के पास अपने कर्मचारियों को तनख्वाह देने तक के पैसे नहीं हैं। साफ-सफाई, बिल्डिंग नक्शे संबंधी काम के लायक भी नहीं रह गई है एमसीडी। सफाई कर्मियों, शिक्षकों, मेडिकल स्टाफ इत्यादि को तनख्वाह नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी भ्रष्ट नगर निगम देश तो क्या, पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती है। खुद बीजेपी के नेता मानते हैं कि एमसीडी में काफी भ्रष्टाचार है। यही कारण है कि केंद्र सरकार द्वारा देश के अन्य सभी नगर निकायों को आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि दिल्ली नगर निगम को केंद्र सरकार द्वारा कोई राशि नहीं मिलती। आखिर क्या कारण है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, लेफ्ट या अन्य दलों के नेतृत्व वाले नगर निकायों को केंद्र से सहायता मिलती है, लेकिन बीजेपी शासित दिल्ली नगर निगम को केंद्र से एक भी पैसा नहीं मिलता।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली नगर निगम को केंद्र से 11500 करोड़ रुपये मिलने चाहिए। लेकिन केंद्र का मानना है कि इसे नहीं दे सकते क्योंकि बीजेपी वाले इन पैसों को खा जाएंगे। भले ही ऐसी मदद करना कानून में लिखा हो, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण केंद्र सरकार दिल्ली नगर निगम को पैसे नहीं दे रही। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कई बार केंद्र सरकार को पत्र लिखकर दिल्ली नगर निगम का सारा पैसा देने का अनुरोध किया। लेकिन केंद्र की बीजेपी सरकार को दिल्ली नगर निगम पर भरोसा नहीं है। इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की तकलीफ को देखते हुए सैलरी पैसे का इंतजाम करने का आदेश दिया है। एमसीडी में भ्रष्टाचार काफी चरम पर है। प्रति लिंटर पैसों की वसूली होती है। नगर निगम को व्यक्तिगत पैसे कमाने का धंधा बना लिया गया है। एमसीडी के लोग पर्सनल पैसा बनाने में लगे हैं, जिसके कारण नगर निगम दिवालिया हो गया है।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि मनोज तिवारी ने 2017 के नगर निकाय चुनाव में कहा था कि केंद्र से सीधा पैसा लाएंगे। हमने उन्हें उस वादे की याद दिलाई। लेकिन वह कहते हैं कि चुनाव में कहा था और कानून में लिखा भी है, लेकिन हमें मालूम है कि नगर निगम के बीजेपी नेता पूरी तरह भ्रष्ट हैं, उन्हें जो भी पैसा मिलेगा, वह खा जाएंगे, चोरी कर लेंगे। इसलिए विपक्ष के नगर निगमों को केंद्र सरकार पैसे दे रही है, जबकि बीजेपी शासित दिल्ली नगर निकाय को कोई सहायता नहीं दे रही है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नगर निकाय चुनाव में भी बीजेपी ने खुद माना था कि उनके पार्षद चोरी में लगे हैं, इसलिए उन्होंने अपने सारे प्रत्याशी बदल दिए थे। इस बार फिर कह रहे हैं कि दोबारा सबको बदलेंगे क्योंकि सारे चोरी करने में लगे हैं। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व और केंद्र सरकार का भी मानना है कि यह लोग सारे पैसे खा जाते हैं, इसलिए इन्हें सहायता नहीं दी जा सकती।

सिसोदिया ने कहा कि कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं मिलना हमारे लिए काफी तकलीफ की बात है क्योंकि यह हमारी दिल्ली के ही अपने लोग हैं। इसलिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि इनका दुख हमसे देखा नहीं जा रहा। इनकी कोई गलती नहीं है। उन्होंने काम किया है तो तनख्वाह मिलनी चाहिए। इसलिए माननीय मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि कहीं से भी इंतजाम करके इनकी मदद करें। हालांकि दिल्ली सरकार के पास भी फंड की कमी है। हमारा जो राजस्व आता था वह मात्र 50 फीसदी आ रहा है। टैक्स के आधे पैसे आ रहे हैं। इसके कारण हमें काफी योजनाओं को रोकना पड़ा है। नियमतः दिल्ली सरकार की कोई देनदारी नहीं होने के बावजूद कर्मचारियों की सैलरी के लिए 938 करोड़ दिए जा रहे हैं।

सिसोदिया ने कहा कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण मार्केट का भी बुरा हाल है। दिल्ली सरकार अपना काम मुश्किल से चला रही है। इसके बावजूद नगर निगम के कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए हमने अन्य योजनाओं को रोककर तथा अन्य विभागों की राशि काटकर किसी तरह 938 करोड़ रुपयों का इंतजाम किया है। यह राशि सैलरी के लिए दी जा रही है। अब मैं बीजेपी वालों से कहना चाहूंगा कि इन पैसों को भी चोरी मत कर लेना, इनसे कर्मचारियों की तनख्वाह देना। उन्होंने कहा कि अब एमसीडी का यह संकट सिर्फ एक साल की बात है। अगले साल नगर निगम में भी आम आदमी पार्टी की सरकार आएगी। जिस तरह दिल्ली सरकार का बजट 30000 करोड़ से बढ़कर 60000 करोड़ कर दिया, उसी तरह एमसीडी का भी बजट बढ़ेगा और संसाधन बढ़ेंगे। ईमानदारी से काम होगा तो यह दिन फिर नहीं देखने होंगे।

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