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पत्रकारिता से नए संपर्क बनते हैं एवं नए रास्ते खुलते हैं: प्रो संजय द्विवेदी

– डीयू: पत्रकारिता की चुनौतियां एवं संभावनाएं पर आयोजित किया कार्यक्रम
– मीडिया में अंग्रेजी बोलने वाले भी हिंदी का प्रयोग कर रहे हैं

नई दिल्ली, 22 नवम्बर 2022: डॉ भीम राव अंबेडकर कॉलेज में प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए पत्रकारिता की चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम का  आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक प्रो संजय द्विवेदी, विशिष्ट अतिथि प्रो निरंजन कुमार 
और डॉ आदर्श कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रो महावीर वत्स, प्रो रविंद्रनाथ दुबे, डॉ बिजेंद्र कुमार और शशि रानी भी रहीं। महानिदेशक प्रो संजय द्विवेदी ने छात्रों को इस पाठ्यक्रम की चुनौतियों और संभावनाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता रचनात्मकता की दुनिया है। यदि रचनात्मकता नहीं होगी तो इस क्षेत्र में कोई भी टिक नहीं सकता। इस दौरान डीयू के अधिष्ठाता प्रो निरंजन कुमार, कॉलेज के प्राचार्य प्रो रविंद्र नाथ दुबे, हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार के सह-संयोजक डॉ बिजेंद्र कुमार ने भी उक्त विषय पर प्रकाश डाला। प्रो शशि रानी ने उपस्थित अतिथिगण एवं छात्रों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

महानिदेशक प्रो संजय द्विवेदी ने आगे कहा कि पत्रकारिता से नए संपर्क बनते हैं एवं नए रास्ते खुलते हैं। उन्होंने डिजिटल मीडिया के बारे में तीन महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख करते हुए बताया कि ये तीन चीजें हैं -आवाज, वीडियो और स्थानिक भाषा। विद्यार्थियों के मन में हिंदी न सीखने की बेचैनी को भी दूर करते हुए उन्होंने बताया कि मीडिया में अंग्रेजी बोलने वाले भी हिंदी का प्रयोग कर रहे हैं। यह हिंदी की श्रेष्ठता को दर्शाता है। संजय द्विवेदी ने आगे कहा कि यदि हम किसी भी क्षेत्र में सकारात्मक मन से प्रवेश करेंगे तो कभी भी दुखी नहीं होंगे।  कार्यक्रम में डॉ चित्रा रानी, डॉ राकेश यादव, डॉ विनीत कुमार, डॉ नरेंद्र कुमार सहित कई शिक्षक एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

डीयू के अधिष्ठाता प्रो निरंजन कुमार ने भी पत्रकारिता पाठ्यक्रम की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसमें प्रैक्टिकल का होना जरूरी है। प्रौद्योगिकी ने आज तकनीक को पूरा बदल दिया है। पाठ्यक्रम को भी इसके अनुकूल करने की जरूरत है। उन्होंने इंस्टीट्यूट और इंडस्ट्री के बीच में अंतर को भी बताया और कहा कि हमें एक ऐसा पाठ्यक्रम तैयार करना होगा जो इंडस्ट्री की आवश्यकताओं को पूरी कर सके। उन्होंने हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए छात्रों को उसे पढ़ने के लिए प्रेरित किया। 

कॉलेज के प्राचार्य प्रो रविंद्र नाथ दुबे पत्रकारिता में सांसारिक ज्ञान को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि नई से नई तकनीक भी आए, हमें उसके साथ चलना होगा। उन्होंने कॉलेज में मीडिया लैब खोले जाने पर भी बात कही ताकि छात्र अपनी प्रतिभाओं को  लैब के माध्यम से और निखार सके। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि हमेशा विषय की गंभीरता को समझे एवं अपनी संस्कृति से जुड़े रहें। प्राचार्य ने हर्ष जताया कि आज देश के सभी मीडिया संस्थान में हमारे छात्र काम कर रहे हैं।

हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार के सह-संयोजक डॉ बिजेंद्र कुमार ने मीडिया की चुनौतियों एवं अवसरों को रेखांकित करते हुए कहा कि डिजिटल मीडिया के आने से युवाओं के लिए नया मार्ग खुला है। उन्होंने एनइपी को देखते हुए बताया कि अंग्रेजी की किताब सही रूप से हिंदी में अनुवाद हो जाए तो हिंदी के विद्यार्थियों के लिए लाभकारी होगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के छात्रों को जितना संसाधन उपलब्ध कराया जा रहा है यदि उतनी ही मात्रा में हिंदी के छात्रों को उपलब्ध कराया जाए तो उन्हें इस क्षेत्र में दिक्कत नहीं आएगी।

अंबेडकर कॉलेज के पूर्व छात्र एवं मीडिया में कई काम के धनी डॉ आदर्श कुमार बताते हैं कि सूचना अनगिनत है। इसलिए लोगों तक कौन सी सूचना पहुँचे, इसका चयन करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति और विनम्रता के आधार पर किसी भी ऊँचाई तक पहुँचा जा सकता है। इसके लिए लगातार मेहनत करना पड़ेगा एवं सीखते रहना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि हिंदी पत्रकारिता में अंग्रेजी से अधिक अवसर हैं। इसीलिए जो बच्चे हिंदी पढ़ रहे हैं उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। हिंदी में लेखन क्षेत्र के कई आयाम खुल चुके हैं। उन्होंने टीवी पत्रकारिता पर किताबें न के बराबर होने पर भी खेद जताया। प्रो शशि रानी ने उपस्थित अतिथिगण एवं छात्रों का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में डॉ चित्रा रानी, डॉ राकेश यादव, डॉ विनीत कुमार, डॉ नरेंद्र कुमार सहित कई शिक्षक एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

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