Thursday, February 29, 2024
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दिल्ली विश्वविद्यालय के कामकाज को ऑन लाइन तरीके से निपटाए प्रशासन: प्रोफेसर हंसराज सुमन

  1. डीयू विभागों और कॉलेजों में शैक्षिक पदों के लिए तदर्थ नियुक्तियों, अतिथि शिक्षकों के लिए पैनल बनाने की मांग
  2. ऑन लाइन एडहॉक पैनल बनाने की मांग के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति को लिखा पत्र
  3. स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करे और एडहॉक शिक्षकों की सर्विस जोड़ दे प्राथमिकता
  4. एडहॉक शिक्षकों के नियमितीकरण में एडहॉक सर्विस का विशेष ध्यान रखा जाये
  5. पैनल श्रेणियों के अलावा पहली से सातवीं केटेगिरी तक रखे जाते हैं नाम

नई दिल्ली: फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ने कोरोना महामारी के कारण आए संकट को देखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश कुमार त्यागी को पत्र लिखकर मांग रखी और सुझाव दिए हैं कि डीयू से सम्बद्ध विभागों में तदर्थ व अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियों के लिए बनने वाले पैनल के लिए शोधार्थियों, उम्मीदवारों से ऑन लाइन नाम मंगवाए जाए ताकि शैक्षिक सत्र -2020-21 में होने वाली तदर्थ व अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियों में इस वर्ष नेट, जेआरएफ और पीएचडी धारक उम्मीदवार भी आवेदन कर सके। इसके लिए हर विभाग को ऑन लाइन एडहॉक पैनल में नाम जोड़ने के लिए डीन और विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी किए जाए।

फोरम के चेयरमैन व दिल्ली विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद के पूर्व सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन ने कुलपति को लिखे पत्र में बताया है प्रति वर्ष तदर्थ व अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियों के लिए हर विभाग अपने विषय का पैनल तैयार करता है। इसके लिए अप्रैल, मई और जून माह में प्रत्येक विभाग योग्य शोधार्थियों, उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करता है। शोधार्थियों, उम्मीदवारों की योग्यता के आधार पर ही एडहॉक पैनल की कई श्रेणियां बनाई जाती है जैसे सामान्य, ओबीसी ,अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विक्लांग ईडब्ल्यूएस आदि के अलावा पहली से सातवीं केटेगिरी तक नाम रखे जाते हैं। उन्होंने बताया है कि विभाग द्वारा जारी पैनल में से ही विभिन्न शिक्षण विभागों और कॉलेजों में तदर्थ, अतिथि शिक्षकों के पदों के लिए विचार किया जाता है।

प्रोफेसर सुमन ने उन्हें बताया है कि विभागों में बनने वाले उम्मीदवारों के एडहॉक पैनल हर साल अप्रैल के अंत से 30 जून तक विभिन्न श्रेणियों में उम्मीदवारों का एक पैनल बनाने के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया है कि कुछ विभाग नवम्बर-दिसम्बर में या नेट परीक्षा के परिणाम के बाद पैनल में नाम जोड़ने के लिए आवेदन आमंत्रित करते हैं जिसे वैकल्पिक सूची में उन नामो को जोड़ दिया जाता है। इसी प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए, प्रत्येक विभाग ने पिछले साल यानी 2019 में एक पैनल तैयार किया था। महामारी की स्थिति को देखते हुए और लॉकडाउन की स्थिति को देखते हुए इस संदर्भ में कुछ सुझाव है जिन पर विचार किया जाना आवश्यक है।

प्रोफेसर सुमन ने कुलपति को सुझाव देते हुए कहा है कि जिन उम्मीदवारों के नाम शैक्षिक सत्र 2019–20 के एडहॉक पैनल में हैं, उन्हें इस वर्ष नए सिरे से आवेदन करने से छूट दी जाए और उनके नाम पुनः एडहॉक पैनल में शामिल किए जाये क्योंकि यह पैनल 2020 तक है। ऐसा करने से विभाग, कार्यालय के काम को कम करेगा और काफी हद तक विभाग की समस्या का समाधान करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा है कि ऑनलाइन आवेदन केवल उन उम्मीदवारों से ही आमंत्रित किये जाए जिन्होंने एडहॉक पैनल में पहले आवेदन नहीं किया है और जो शैक्षिक सत्र-2020-21 में कॉलेजों में एडहॉक, अतिथि शिक्षक नियुक्तियों के लिए आवेदन करना चाहते हैं। साथ ही वे शोधार्थी, उम्मीदवार जिनकी अतिरिक्त योग्यता प्राप्त करने के कारण श्रेणी बदली जानी है, और वे आवेदन करना चाहते हैं तो उनकी ऑन लाइन एप्लिकेशन के लिए कहा जाए।

प्रोफेसर सुमन ने कुलपति को लिखे पत्र में यह भी याद दिलाया है और मांग की है कि विश्वविद्यालय, कॉलेजों में लंबे समय से पढ़ा रहे एडहॉक शिक्षकों का एमएचआरडी के दिसम्बर-2019 के सर्कुलर को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाए। उनका कहना है कि जब भी स्थायी नियुक्ति हो उसमें आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए एडहॉक शिक्षकों के नियमितीकरण में एडहॉक सर्विस का विशेष ध्यान रखा जाये ताकि वह इस सिस्टम से बाहर न हो। उन्होंने यह भी मांग की है कि विश्वविद्यालय के विभागों और कॉलेजों में सभी कार्यरत एडहॉक शिक्षकों की सेवाओं को जारी रखते हुए गर्मी की छुट्टियों के दौरान उनकी सेवाओं को जारी रखने के लिए परीक्षा, परीक्षा का मूल्यांकन, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच, छात्रों के प्रवेश संबंधी कार्य करने के लिए एडहॉक शिक्षकों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया है कि आज कॉलेजों में 60 फीसदी एडहॉक शिक्षक है इसलिए एडमिशन, एग्जामिनेशन और मूल्यांकन आदि में इनकी जरूरत पड़ती है।

                
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