Friday, May 10, 2024
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य बहुत सारे कर्मचारी कोरोना महामारी से लड़ रहे हैं: अरविंद केजरीवाल

  • कोविड योद्धाओं को विशेष सुविधाएं देने की घोषणा का विपक्ष ने मजाक उड़ाया, इससे बहुत दुख हुआ
  • कोविड योद्धा अपनी जान जोखिम में डाल कर हमारी रक्षा कर रहे हैं, दिल्ली सरकार इन्हें लेकर बहुत संवेदनशील है
  • दिल्ली के लोग बताएं, क्या कोविड से हमारी रक्षा करने वाले योद्धाओं को विशेष सुविधाएं मिलनी चाहिए या नहीं
  • हमारी रक्षा करते हुए मरने वाले योद्धाओं के परिवार को एक करोड़ रुपये सम्मान राशि देने से विपक्ष को तकलीफ क्यों
  • सभी से अपील, यह समय राजनीतिक बयानबाजी करने का नहीं, सभी को एक-दूसरे की मदद करने और कोरोना से लड़ने का है

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को डिजिटल प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि कोविड की लड़ाई हमारे डाॅक्टर्स, नर्सेज, पुलिस, सीविल डिफेंस वालेंटियर्स, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और बहुत सारे शिक्षक आदि लोग लड़ रहे हैं। यह लोग फ्रंट लाइन पर लड़ रहे हैं और एक तरह से अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। हमारा फर्ज बनता है कि हम जो कुछ भी कर सकते है, वह करें और अभी तक हम कर भी कर रहे हैं। दिल्ली सरकार इस बारे में बहुत ही संवेदनशील है। समय-समय पर जो भी हो सकता है हम करते हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कल हमने आदेश जारी किया था कि राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, जिसे कोविड अस्पताल घोषित किया है, उसके साथ सरकार ने 2-3 फाइव स्टार होटल को संबंद्ध कर दिया है। एक तरह से होटल भी अस्पताल का हिस्सा बन गए हैं। अस्पताल ने अपनी सुविधाएं अस्पताल तक बढ़ा दी हैं। अगर कोई भी कोविड योद्धा बीमार पड़ता है, तो उसका अच्छी तरह से इलाज करने के लिए हमने उसके लिए फाइव स्टार होटल में व्यवस्था की है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विपक्ष द्वारा कोविड योद्धाओं को सरकार की तरफ से विशेष सुविधाएं देने की घोषणा करने का मजाक उड़ाने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कोविड योद्धाओं को विशेष सुविधाएं देने की घोषणा का विपक्ष मजाक उड़ा रहा है, इससे मुझे बहुत दुख हुआ है। कोविड योेद्धा अपनी जान जोखिम में डाल कर हमारी रक्षा कर रहे हैं और दिल्ली सरकार उनके प्रति बेहद संवेदनशील है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों से पूछा कि क्या कोविड से हमारी रक्षा करने वाले योद्धाओं को विशेष सुविधा मिलनी चाहिए या नहीं? हमारी रक्षा करते हुए मरने वाले कोविड योद्धाओं के परिवार को दिल्ली सरकार एक करोड़ की सम्मान राशि दे रही है, तो इससे विपक्ष को तकलीफ क्यों है?

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों से पूछा कि यह व्यवस्था करके हमने क्या गलत किया है? मुझे लगता है कि जो कुछ भी हो सकता है, हमें करना चाहिए। वो लोग रात-दिन, 24 घंटे हमारे लिए मेहनत कर रहे हैं। हमारे लिए अपनी जान दांव पर लगा कर मेहनत कर रहे हैं। उन्हें कोविड हो सकता है। अगर उनको कोविड हो जाएगा, तो उन्हें ठीक करने की जिम्मेदारी हमारी है, पूरे देश की है और पूरे समाज की है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कल हमें बहुत दुख हुआ। जब हमने यह आदेश जारी किया, तो विपक्ष के लोगों ने इसका खूब मजाक उड़ाया और इसकी जमकर आलोचना की। विपक्ष का कहना है कि इन लोगों को विशेष सुविधाएं क्यों दी जा रही है?। मैं दिल्ली के लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या कोविड से हमारी रक्षा करने वाले योद्धाओं को विशेष सुविधाएं मिलनी चाहिए या नहीं। बिल्कुल मिलनी चाहिए। इनके इलाज में 5-10 करोड़ रुपये खर्च हो गए, तो इसमें क्या गलत है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर कोविड से किसी भी योद्धा की मौत होती है और उसे हम 1 करोड़ रुपये देते हैं। उसके परिवार को मरणोपरांत यह सम्मान राशि दी जाती है, तो इससे क्या दिक्कत है। अभी पुलिस में तैनात अमित राणा जी की कुछ दिन पहले कोराना की वजह से मौत हो गई। वह हमारी रक्षा कर रहे थे। उनके परिवार के लिए मैने एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि का ऐलान किया, इसमें विपक्ष को क्यों तकलीफ है। मेरा सभी से निवेदन है कि यह समय राजनीति करने का नहीं है। यह समय सबको मिल कर कोरोना बचने के लिए देश और समाज के लिए क्या कर सकते हैं, यह सोचने का है। मेरी सबसे निवेदन है कि वे राजनीतिक बयानबाजी न करें। एक-दूसरे की मदद करें। सरकारों की मदद करें और एक-दूसरे का साथ दें।

  • 6923 पाॅजिटिव केस में से 1476 लोग अस्पतालों में भर्ती

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी बुजुर्गों से अपील की है कि आपकी जान हमारे लिए बहुत कीमती है। सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और अपना हाथ बार-बार धोएं। साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव के लिए आप जो भी उपाय कर सकते हैं, वह सब करें। मुख्यमंत्री ने अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में 6923 केस पाॅजिटिव हुए हैं। इनमें से केवल 1476 केस अस्पतालों में हैं। इनमें से 1500 के करीब केस अभी अस्पतालों में हैं। बाकी सभी केस मामूली या हल्के लक्षणों वाले हैं। अस्पतालों में इलाज करा रहे 1500 मरीजों में से अभी 91 लोग आईसीयू में हैं और 27 वेंटिलेटर पर हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो भी गंभीर केस हैं, उन सभी पर मैं रोज नजर रखता हूं और पता करता हूं कि कैसे उन्हें बचाया जा सके। किसी को मरने नहीं दिया जाए और सभी सही सलामत ठीक होकर अपने घर लौटे। हम देख रहे हैं कि अधिकतर केस हल्के लक्षणों वाले हैं। यह करीब 75 प्रतिशत हैं।

  • हल्के और कम लक्षणों वाले मरीजों को घर में आइसोलेशन की दी जा रही इजाजत

केंद्र सरकार ने अब आदेश निकाला है कि उनका इलाज घर पर भी हो सकता है। उन्हें अस्पतालों में आने की कोई जरूरत नहीं है। जो लोग हल्के और कम लक्षणों वाले हैं, उनको हल्का बुखार या खांसी है, उन सब लोगों के इलाज का हमने घर पर इंतजाम किया है। हमारी टीम उनके घर पर जाती है। परिवार के सभी सदस्यों को बैठा कर इलाज के बारे कें समझाती है। इससे पहले, उनके परिवार को देख कर आती है कि क्या मरीज के लिए अलग कमरा है? क्या उनके घर में एक अलग से शौचालय है? क्या उनको अपने घर में आइसोलेशन किया जा सकता है। अगर यह सुविधाएं हैं, तो फिर उस परिवार के मरीज को घर में इलाज करने की इजाजत दी जाती है। प्रतिदिन हमारी टीम की तरफ से फोन जाता है। लगातार उनके संपर्क में रहते हैं। मरीज की देखभाल करने वाले को भी फोन नंबर दे दिया जाता है। यदि किसी भी तरह की तकलीफ है, तो वे हमसे संपर्क में रह सकते हैं। जिन लोगों के घरों में होम क्वारंटाइन करने के लिए अलग से कमरा नहीं है, उन लोगों के लिए सरकार ने कोविड केयर सेंटर बनाए हैं और उन लोगों को वहां पर ले जाया जाता है और उन्हें 14 दिन रखते हैं, जब तक वे निगेटिव नहीं हो जाते हैं। ऐसे कम लोग हैं, जो गंभीर हैं और ऐसे बहुत कम लोग हैं, जिनकी मोत हो रही है।

  • प्राइवेट अस्पताल के एंबुलेंस भी देंगी सरकारी सेवा

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि एंबुलेंस की थोड़ी दिक्कत हो रही थी। मुझे यह बताया गया था कि कुछ लोगों को फोन करने पर भी एंबुलेंस के लिए कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। कल हम लोगों ने आदेश निकाल कर कई सारी प्राइवेट अस्पतालों की एंबुलेंस भी सरकारी सेवा में शामिल कर ली हैं। इसके साथ हमारी सरकारी एंबुलेंस भी हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वो एंबुलेंस अपने प्राइवेट अस्पतालों के लिए काम नहीं करेगी। जो एंबुलेंस प्राइवेट अस्पतालों में थी और प्राइवेट अस्पतालों की थी, वह एंबुलेंस वहां पर काम करती रहेंगी। लेकिन अगर उन्हें फोन जाता है और कोई सरकारी ड्यूटी दी जाती है, तो उनको सरकारी ड्यूटी भी करनी पड़ेगी। यह आदेश निकाल दिए गए हैं। इससे मुझे उम्मीद है कि एंबुलेंस की दिक्कत अब खत्म हो जानी चाहिए।

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