Thursday, February 22, 2024
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स्वच्छ शौचालय और सुविधाओं की कमी के कारण अपनी नौकरी भी छोड़नी पड़ जाती है : राजेंद्र पाल गौतम

  • महिला एवं बाल विकास मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और डीसीपीसीआर ने शुरू किया “मासिक धर्म स्वच्छता अभियान”
  • अभियान के दौरान दिल्ली के पूर्व और उत्तर पूर्व जिलों में महिलाओं को 1 लाख सैनिटरी नैपकिन वितरित करेगी दिल्ली सरकार
  • गैर सरकारी संगठन और सिविल सोसायटी संगठनों की भागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक जागरूकता है सरकार का लक्ष्य


नई दिल्ली : मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और दिल्ली बाल संरक्षण आयोग ने “मासिक धर्म स्वच्छता अभियान” को लॉन्च किया। सप्ताह भर चलने वाले इस अभियान में आयोग, दिल्ली के पूर्व और उत्तर पूर्व जिलों की विभिन्न क्लस्टर में रहने वाली महिलाओं और बालिकाओं को एक लाख से अधिक सैनिटरी नैपकिन वितरित करेगा।

आयोग का उद्देश्य है कि इस अभियान के माध्यम से दिल्ली सरकार, सामाजिक संगठनों की मदद से मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागरूकता लाए और अधिक से अधिक घरों तक जागरूकता पहुंचाई जा सके। इस अभियान में केवल महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुषों की भी भागीदारी होगी।
कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा कि “मासिक धर्म स्वच्छता” के बारे में जागरूकता पारिवारिक स्तर पर शुरू करने की आवश्यकता है। विभिन्न सामाजिक-आर्थिक बाधाओं के कारण, विशेष रूप से झुग्गी-झोपड़ी और जेजे क्लस्टर में रहने वाली महिलाओं को साफ शौचालय तक उपलब्ध नहीं है । इस अभियान के माध्यम से हमारा उद्देश्य सिर्फ यह नहीं है कि हम केवल सैनिटरी नैपकिन वितरित करें, बल्कि मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में परिवारों के बीच जागरूकता पैदा भी करें। हमें उस कलंक से छुटकारा पाने की जरूरत है, जो मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ा हुआ है। जिससे सार्वजनिक जीवन में पुरुषों और महिलाओं दोनों की समान भागीदारी बने।

कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने आगे कहा कि भारत में मासिक धर्म स्वच्छता को लेकर छुआछूत है। कई बार तो इसकी वजह से महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। कई मामलों में, लड़कियों को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ती है या महिलाओं को स्वच्छ शौचालय और सुविधाओं की कमी के कारण अपनी नौकरी भी छोड़नी पड़ जाती है। इस अभियान के माध्यम से, महिला एवं बाल विकास विभाग का उद्देश्य इन सभी मुद्दों को बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भागीदारी और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से संबोधित किया जाए।

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