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अस्पताल में भर्ती होने के लिए SHO को 24 घंटे अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं: मनोज तिवारी

  • केजरीवाल सरकार की निजी अस्पतालों से कोई मिलीभगत है
  • अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए 2500 के करीब बेड खाली है
  • मरीजों को 16-16 घंटों तक अस्पताल के बाहर जमीन पर लिटा रहे हैं
  • सिर्फ टीवी और विज्ञापनों में दिखने के अलावा दिल्ली के लोगों के बीच में जाकर देखें

नई दिल्ली: दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधुड़ी ने फेसबुक लाइव पर दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोली। इस दौरान तिवारी ने कहा कि जब एक कोरोना वॉरियर एसएचओ को इलाज के लिए भर्ती होने के लिए 24 घंटे अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं तो इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम लोगों को कोरोना से इलाज के लिए बेड मिलने में कितनी परेशानी हो रही है। केजरीवाल कहते हैं कि अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए 2500 के करीब बेड खाली है लेकिन जब किसी मरीजों को बेड की आवश्यकता होती है तो न जाने हजारों बेड कहां विलुप्त हो जाते हैं।

मनोज तिवारी ने कहा कि जीटीबी अस्पताल का वीडियो इंसानियत को शर्मसार करने वाला है जहां कोविड के मरीजों को 16-16 घंटों तक अस्पताल के बाहर जमीन पर लिटा रहे हैं, तो कहीं मरीज के परिवार वाले स्ट्रेचर पर उन्हें लिटा कर ले जा रहे हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री प्रतिदिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना से निपटने के लिए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कसीदे पढ़ते है लेकिन वास्तव में दिल्ली के लोग इस बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था से त्रस्त हो चुके हैं। आजकल निजी अस्पताल कोरोना पोसिटिव मरीजों से अंधाधुंध पैसा ले रहे हैं, कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां निजी अस्पताल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए 5 लाख से 15 लाख रुपए तक ले रहे हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना के मरीजों को निजी अस्पताल में जाने की सलाह देते हैं, क्या केजरीवाल सरकार की निजी अस्पतालों से कोई मिलीभगत है। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से यह मांग करता हूं कि वह यथाशीघ्र निजी अस्पतालों से बात करें और उन्हें निर्देशित करें कि कोरोना टेस्टिंग या इलाज के खर्च को एक सीमित दायरे में रखें ताकि गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार पर इलाज को लेकर कोई आर्थिक बोझ न पड़े।

नेता विपक्ष बिधूड़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री केजरीवाल से आग्रह है कि सिर्फ टीवी और विज्ञापनों में दिखने के अलावा दिल्ली के लोगों के बीच में जाकर देखें कि कोरोना संकट से वो कैसे लड़ रहे हैं, अस्पताल में जाकर देखें कि वहां की हालत कितनी खराब है, जितनी संख्या वह बेड की बता रहे हैं वह असल में वहां पर उपलब्ध है भी या नहीं। उन्होंने कहा कि मेरा दिल्ली सरकार से अनुरोध है कि जिन अस्पतालों को रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध करवाई गई है उनके पास उपलब्ध हजारों बेड कोरोना से पीड़ित मरीजों के लिए सुनिश्चित किए जाएं।

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