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दिल्ली सरकार वित्तपोषित कॉलेजों में ग्रांट-कट के विरोध में मुख्यमंत्री आवास पर ड़ूटा का धरना

– अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल कार्यालय में ज्ञापन सौंपा – दिल्ली सरकार का शिक्षा मॉडल बिना वेतन वाला शिक्षक विरोधी मॉडल है – 12 कॉलेजों की इमारतें हैं जर्जर हालात में, हो सकती है बड़ी दुर्घटना – दिल्ली सरकार की गवर्निंग बॉडी को बर्खास्त किया जाए तदर्थ शिक्षकों का कैरियर अधर में लटका हुआ है

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2022: दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित 12 कॉलेजों में फंड कटौती के विरोध में एवं पूर्ण तथा नियमित ग्रांट जारी करने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आवास पर विरोध प्रदर्शन किया। तीन दिवसीय डूटा हड़ताल के दूसरे दिन भी डीयू में कक्षाएं बाधित रहीं। दिल्ली सरकार द्वारा वित्तपोषित 12 कॉलेजों के शिक्षक पिछले चार वर्षों से ग्रांट कट और वेतन संकट का सामना कर रहे है। डूटा अध्यक्ष प्रोफेसर ए के भागी ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि 12 कॉलेजों में वेतन कटौती एक बड़ी समस्या बनी हुई है। दिल्ली सरकार द्वारा शिक्षक एवं गैर शिक्षक कर्मियों को वेतन देने में लगातार विलंब करने के साथ ग्रांट कटौती की जा रही है। दिल्ली सरकार की विद्यार्थी विकास फंड पर नजर है। सरकार 12 कॉलेजों में स्व-वित्तपोषित व्यवस्था शुरू करना चाहती है।


डूटा अध्यक्ष प्रोफेसर भागी ने कहा कि हम स्व-वित्तपोषित व्यवस्था बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। दिल्ली सरकार उच्च शिक्षा को निजीकरण करने पर उतारू है। दिल्ली सरकार शिक्षकों के प्रति संवेदनहीनता की सीमा पार कर चुकी है। दिल्ली सरकार का शिक्षा मॉडल बिना वेतन वाला शिक्षक विरोधी मॉडल है, जो डीयू में एक्सपोज हो चुका है। दिल्ली सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्तपोषित कॉलेजों के शिक्षकों एवं अन्य कर्मियों के वेतन के साथ-साथ 7वें पे कमिशन का एरियर, प्रमोशन का एरियर, मेडिकल बिल, एलटीसी पैसे का भुगतान वर्षों से बकाया है।


दिल्ली सरकार एजुकेशन कॉलेज को भी कॉलेज ऑफ आर्ट्स की तरह ही अम्बेडकर विश्वविद्यालय के विभाग में बदलना चाहती हैं। दिल्ली सरकार की मंशा डीयू से कॉलेजों को तोड़कर कमजोर करना है। पोल खोलते हुए डूटा अध्यक्ष भागी ने कहा कि दिल्ली सरकार के वित्तपोषित 12 कॉलेजों की इमारतें जर्जर हालात में है, कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। जिन कॉलेजों के पास अपनी बिल्डिंग नही है, उनको दिल्ली सरकार ने 10 वर्षों से नजरअंदाज किया हुआ है। आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, इंदिरा गांधी शारीरिक शिक्षा, अदिति और भगिनी निवेदिता कॉलेज को अभी तक इमारत नहीं मिली है, इन कॉलेजों को आवंटित जमीन भी दिल्ली सरकार ने छीन ली है।


अध्यक्ष प्रो. भागी ने कहा कि 12 कॉलेजों में दिल्ली सरकार के गवर्निंग बॉडी अध्यक्ष द्वारा शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है, साथ ही प्रिंसिपलों पर स्टूडेंट वेलफेयर फ़ंड के पैसे से सैलरी देने का दबाव बनाया जाता रहा है। प्रिंसिपल एसोसिएशन एवं डूटा ने डीयू के कुलपति को दिल्ली सरकार के गैरज़रूरी हस्तक्षेप के बारे में बार-बार लिखा है। शिक्षकों की सैलरी देने में विफल दिल्ली सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। डूटा ने कुलपति से मांग है कि दिल्ली सरकार की गवर्निंग बॉडी को बर्खास्त किया जाए।


डूटा सचिव डॉ सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि 12 कॉलेजों में कार्यरत तदर्थ शिक्षक की पोस्ट अनुमोदन न होने के कारण इन शिक्षकों का कैरियर अधर में लटका हुआ है। धरने को सम्बोधित करते हुए डीयू ईसी प्रोफेसर वीएस नेगी ने दिल्ली सरकार की अकर्मण्यता पर निशाना साधा और कहा कि 12 कॉलेजों को लेकर मुख्यमंत्री रोजाना नया झूठ बोल रहे हैं। वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों को घोस्ट बताया जा रहा है। पूर्व डूटा अध्यक्ष, शिक्षक नेताओं ने भी धरने को संबोधित करते हुए दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल की आलोचना की। प्रदर्शन के बाद डूटा प्रतिनिधिमंडल ने प्रो. भागी के नेतृत्व में अपनी मांगों को लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल कार्यालय में ज्ञापन सौंपा।

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