Tuesday, April 23, 2024
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बिना स्थायी प्राचार्य के चल रहे हैं 20 से अधिक कॉलेज: प्रोफेसर हंसराज सुमन

  • डीयू प्रशासन ने दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी के नामों की सूची कॉलेजों को भेजी
  • दिल्ली सरकार के कॉलेजों में 15 महीनों से नहीं थी गवर्निंग बॉडी
  • गवर्निंग बॉडी के नामों के भेजे जाने से शिक्षकों, कर्मचारियों में खुशी का माहौल

नई दिल्ली: फोरम ऑफ एकेडेमिक्स फॉर सोशल जस्टिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिल्ली सरकार के वित्त पोषित 28 कॉलेजों की प्रबंध समिति (गवर्निंग बॉडी) के नामों की लिस्ट भेजे जाने पर खुशी जताई है। पिछले 15 महीनों से इन कॉलेजों में प्रबंध समिति के ना होने से प्राचार्य यानि प्रिंसिपलों, शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति व पदोन्नति का कार्य रुका हुआ है। वहीं प्रबंध समिति के नामांे को भेजे जाने पर शैक्षिक व गैर शैक्षिक कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। उन्हें अब जल्द ही पूर्ण प्रबंध समिति मिल सकेगी।

  • इन कॉलेजों में नहीं है स्थायी प्रिंसिपल

फोरम के चेयरमैन व एकेडेमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत 28 कॉलेज आते हैं। श्री अरबिंदो कॉलेज, श्री अरबिंदो कॉलेज (सांध्य) मोतीलाल नेहरू कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज (सांध्य) सत्यवती कॉलेज, सत्यवती कॉलेज (सांध्य ), भगतसिंह कॉलेज ,भगतसिंह कॉलेज (सांध्य) श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, विवेकानंद कॉलेज, भारती कॉलेज, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉलेज, महाराजा अग्रसेन कॉलेज, राजधानी कॉलेज, दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज, आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, भगिनी निवेदिता कॉलेज, मैत्रीय कॉलेज, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, (कोर्ट में विचाराधीन है) गार्गी कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज, शिवाजी कॉलेज आदि है। इसके अतिरिक्त कालिंदी कॉलेज की प्रिंसिपल के कुलपति बनने पर पद खाली है। लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल का कार्यकाल पूरा होने वाला है।

प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि दिल्ली सरकार के वित्त पोषित इन 28 कॉलेजों की प्रबंध समिति का कार्यकाल 7 मार्च 2019 को पूरा हो चुका था। पिछले 15 महीनों से इन कॉलेजों में ट्रेंकेटिड गवर्निंग बॉडी कार्य कर रही थीं।दिल्ली सरकार ने पुनः सत्ता में आते ही विश्वविद्यालय प्रशासन पर अपना दबाव बनाया और 14 मार्च 20 को कार्यकारी परिषद की मीटिंग में दिल्ली सरकार द्वारा भेजी गई प्रबंध समिति के सदस्यों के नामो की लिस्ट पास कराई। ईसी में पास हुए सदस्यों की लिस्ट को अब कॉलेजों को भेज दिया गया है। अब कॉलेज प्रिंसिपलों का दायित्व बनता है कि वे जल्द से जल्द गवर्निंग बॉडी के सदस्यों को बुलाकर गवर्निंग बॉडी बनाए ताकि लंबे समय से शैक्षिक व गैर शैक्षिक कर्मचारियों की नियुक्ति व पदोन्नति कराई जा सके।

प्रोफेसर सुमन ने आगे बताया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की 14 मार्च को हुई मीटिंग में 288 सदस्यों के नामों की संस्तुति की गई थी। इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय-144 सदस्य, दिल्ली सरकार-144 सदस्यों के नाम है। उन्होंने बताया है कि प्रत्येक कॉलेज में 5 सदस्य के नाम दिल्ली विश्वविद्यालय और 5 दिल्ली सरकार की ओर से भेजे जाते हैं। इसके अतिरिक्त प्रत्येक कॉलेज में दो प्रोफेसरों के नाम और प्रिंसिपल व दो शिक्षकों के नाम पहले से ही ट्रेंकेटिड गवर्निंग बॉडी के समय से है। ट्रेंकेटिड गवर्निंग बॉडी में चेयरमैन व कोषाध्यक्ष थे। उनके अनुसार अब गवर्निंग बॉडी के नामों की लिस्ट भेजे जाने के बाद प्रातः कॉलेज में 15 सदस्यीय समिति बनेगी वहीं जहां पर प्रातः व सांध्य कॉलेज (दोनों हैं) उनमें 18 सदस्यीय प्रबंध समिति होती है। उनका कहना है कि जिन 4 कॉलेजों में 6-6 नाम पास हुए थे वे अब हटा दिए गए हैं। उन नामों पर सदस्यों ने आपत्ति जताई थी।

प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी के बनने के बाद जल्द ही पूर्ण वित्त पोषित 12 कॉलेजों का ग्रांट रिलीज कराने संबंधी मुद्दे का भी समाधान हो सकता है। इसी तरह नये शैक्षिक सत्र-2020-21 में सितंबर माह से सहायक प्रोफेसर, लाइब्रेरियन, प्रिंसिपल व नॉन टीचिंग के पदों के विज्ञापन आ सकते हैं और नवम्बर से स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। उनका कहना है कि डीयू प्रशासन द्वारा गवर्निंग बॉडी की लिस्ट भेजे जाने के बाद इन कॉलेजों के प्रिंसिपल पूर्ण गवर्निंग बॉडी बनाने की कोशिश होगी।

फोरम के चेयरमैन ने बताया है कि बताया है कि पिछले 15 महीनों से दिल्ली सरकार के कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी के ना रहने से शैक्षिक व गैर-शैक्षिक पदों पर नियुक्ति ना होने से कॉलेजों का कार्य प्रभावित हो रहा है। इन कॉलेजों में 20 से अधिक ऐसे कॉलेज है जिनमें स्थायी प्रिंसिपल नहीं है। स्थायी प्रिंसिपलों के ना होने से स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया रुकी हुई है। उन्होंने बताया है कि कुछ कॉलेजों ने प्रिंसीपल व शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति के विज्ञापन भी ट्रेंकेटिड गवर्निंग बॉडी के समय ही निकाले थे लेकिन उन विज्ञापनों की समय सीमा भी समाप्त हो चुकी है।अब तो गवर्निंग बॉडी बनने के बाद ही नए सिरे से प्रिंसिपल व शिक्षकों के पदों के पुनः विज्ञापन दिए जाएंगे।

प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि दिल्ली सरकार के वित्त पोषित 28 कॉलेजों में 12 कॉलेजों को शत प्रतिशत अनुदान दिया जाता है बाकी 16 कॉलेजों को सरकार की ओर से 3 फीसदी अनुदान दिया जाता है। इन कॉलेजों में पिछले दो साल से पांच साल व अधिक से प्रिंसिपलों के पद खाली पड़े हुए हैं। प्रिंसिपलों के पदों व सहायक प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति किए जाने को लेकर विज्ञापन निकाले जा चुके हैं जिनकी समय सीमा समाप्त हो चुकी है। 7 मार्च 2019 को इन कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल समाप्त हो चुका था लेकिन ट्रेंकेटिड गवर्निंग बॉडी ने सहायक प्रोफेसर व प्रिंसिपल के पदों को भरने के विज्ञापन निकाले थे। अब डीयू प्रशासन द्वारा नामों की लिस्ट भेजे जाने के बाद जल्द ही नई गवर्निंग बॉडी बन सकेगी।

प्रोफेसर सुमन ने बताया है कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले इन कॉलेजों में लंबे समय से प्रिंसिपलों के पदों को नहीं भरा गया है। प्रिंसिपल का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है लेकिन कुछ कॉलेजों के प्रिंसिपलों ने ओएसडी, कार्यवाहक के रूप में 5 साल से ज्यादा बिता लिया है। उन्होंने बताया है कि 20 से अधिक कॉलेजों में प्रिंसिपलों के पद खाली पड़े हुए हैं। इन कॉलेजों में सबसे ज्यादा दिल्ली सरकार के कॉलेज है जहां पिछले 15 महीनों से बिना गवर्निंग बॉडी के चल रहे हैं। हालांकि इनमें से कुछ में काम चलाऊ ट्रेंकेटिड गवर्निग बॉडी है, कुछ में तो दोनों ही नहीं थी।

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