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लॉक डाउन में जोर शोर से सोशल मीडिया पर मनाया गया मजदूर दिवस

  • केंद्र और दिल्ली सरकार को चेताया
  • विभिन्न संगठनों ने उठाई अपनी आवाज
  • तख्ती पर लिखें नारों से गूंजा सोशल मीडिया
  • इस वर्ष यह दिन विषम परिस्थितियों में मनाया गया

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस दुनिया के दुनिया भर के मजदूरों की एकता व भाईचारे का दिन है। मई दिवस के शहीदों के संघर्ष व बलिदान को याद करने का दिन है। मजदूर वर्ग की पूंजीवादी शोषण दमन से मुक्ति के लिए अपने फर्ज को समझने का दिन है और अपने हकों के लिए लड़ने व संकल्प लेने का दिन है। केंद्रीय मजदूर संगठन ए.आई.यू.टी.यू.सी. ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मई दिवस को शानदार ढंग से मनाने की अपील की थी। इसी को देखते हुए श्रमिक दिवस के मौके पर दिल्ली में विभिन्न श्रमिक संगठनों ने बड़ी संख्या में श्रमिकों के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से श्रमिक दिवस मनाया। कलावती अस्पताल यूनियन से एस एस नेगी, एनपीएचए दिल्ली से विजय कुमार, पंत हस्पताल पेरामेडिकल यूनियन से भारत वीर, अरुणा आसिफ अली अस्पताल से विपति राम, भवन निर्माण मजदूरों से निर्मल कुमार, दिल्ली आशा वर्कर्स एसोसिएशन महासचिव ऊषा ठाकुर व एंटी-मलेरिया कर्मचारी यूनियन से ओम प्रकाश, दिल्ली स्टेट आंगनबाडी वर्कर्स व हेल्पर्स यूनियन सहित कई अन्य संगठनों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने साथियों के साथ पूरे जोश व सम्मान के साथ मजदूर दिवस मनाया।

श्रमिक संगठनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज भी बुलंद करते हुए अपनी मांगों के लिए केंद्र व दिल्ली सरकार को चेताया। दिल्ली आशा वर्कर्स एसोसिएशन ने आशा एक संवेदनशील व कर्मठ वर्कर को 1000 रुपये महीने की खैरात मंजूर नही, 750 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी व संरक्षी साधन दो की आवाज को उठाते हुए मनाया। करीब दो हजार आशा वर्कर्स ने मांग तख्ती हाथ मे लिए फोटो प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री सहित 11 जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को भेजे। बड़े पैमाने पर असंगठित व भवन निर्माण मजदूरों ने अपनी छतों पर लाल झंडे व कपड़ा लहराए। मई दिवस के नारे लगाए व अपनी रोजी रोटी की आवाज उठाई।

ए.आई.यू.टी.यू.सी. के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष हरीश त्यागी व सचिव एम चैरसिया ने दिल्ली के मजदूरों कर्मचारियों को लॉक डाउन में भी व्यापक रूप से मई दिवस को मनाने पर उन्हें अभिनंदन करते हुए कहा है कि लॉक डाउन में कर्मचारियों के खुले विरोध न कर सकने का नाजायज लाभ लेते हुए केंद्र की मोदी सरकार मजदूरों के अधिकारों को छीनने में लगी है। वह देश विरोधी, जन विरोधी, मजदूर विरोधी कदम उठा रही है। भूख से तड़फ कर प्रवासी मजदूर व उनके बच्चे दम तोड़ रहे हैं मगर यह संवेदनहीन सरकार है जो केवल लुभावनी बातें कर रही है। मई दिवस हमे ऐसी अमानवीय सरकारों के खिलाफ लड़ने, शोषण पर आधारित पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ लड़ने और मानव कल्याण के लिए समाजवादी व्यवस्था के लिए लड़ने की प्रेरणा देता है। हम सभी शोषण उत्पीड़न से मुक्त, जात पात, धर्म आधारित झगड़ो से मुक्त, मजदूर वर्ग की व्यवस्था स्थापित करने की शपथ लेते हैं।

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